रायपुर. छत्तीसगढ़ की रायपुर दक्षिण सीट पर हुए उपचुनाव में बीजेपी ने बड़ी मार्जिन से जीत हासिल कर ली है. बीजेपी के सुनील सोनी ने कांग्रेस कैंडिडेट आकाश शर्मा को हरा दिया है. बीजेपी को 89,220 वोट मिले, तो वहीं कांग्रेस के खाते में 43,053 वोट आए हैं. सुनील सोनी ने शुरुआती राउंड से बढ़त बना रखी थी, जो आखिर तक बरकरार रही. कांग्रेस को उम्मीद थी कि इस बार रायपुर दक्षिण में कांटे की टक्कर होगी, लेकिन आकाश शर्मा ऐसा नहीं कर पाए. इस चुनाव में कांग्रेस ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी. नेता, विधायक से लेकर पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रचार की कमान संभाली थी. काफी कोशिशों के बाद भी कांग्रेस बीजेपी के इस किले को नहीं ढहा पाई.
रायपुर दक्षिण विधानसभा सीट छत्तीसगढ़ की हाईप्रोफाइल सीट में से एक है. इस सीट पर पिछले 35 सालों से बीजेपी का दबदबा कायम है. इस बार फिर इतिहास दोहराया गया है. रायपुर दक्षिण में उपचुनाव इसलिए क्योंकि बीजेपी के दिग्गज नेता बृजमोहन अग्रवाल सांसद चुने गए थे. सीट खाली हुई तो बीजेपी ने बृजमोहन अग्रवाल के करीबी माने जाने वाले और पूर्व सांसद सुनील सोनी को यहां से अपना उम्मीदवार बनाया था.
रायपुर दक्षिण में BJP की जीत की सबसे बड़ी वजह
रायपुर दक्षिण सीट पर जीत हासिल करना न सिर्फ बीजेपी बल्कि खुद सांसद बृजमोहन अग्रवाल के लिए भी साख का सवाल था. इस सीट पर बीजेपी ने अपनी पूरी ताकत झोंकी और अब नतीजा आपके सामने है. 2023 में हुए विधानसभा चुनाव में इस सीट पर बृजमोहन अग्रवाल ने इसी सीट पर सबसे ज्यादा वोटों से जीत हासिल करने का रिकॉर्ड भी बनाया था. जानकार बताते हैं कि चुनाव सुनील सोनी लड़ रहे थे, लेकिन चेहरा बृजमोहन अग्रवाल का था. सुनील सोनी को टिकट भी उनकी वजह से मिली. इस चुनाव में कुल 30 उम्मीदवार मैदान में थे. इस बार तीसरे स्थान पर नोटा रहा.
राजनीति के जानकारों की मानें तो रायपुर दक्षिण सीट पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल की एक अलग छवि बनी हुई है. यहां से उन्होंने हमेशा रिकॉड वोटों से जीत हासिल की है. इतना ही नहीं उन्होंने छत्तीसगढ़ की राजनीति का चाणक्य भी कहा जाता है. इस सीट पर बीजेपी की पकड़ काफी मजबूत है. यहां बीजेपी के ट्रडिशनल वोटर्स की संख्या सबसे ज्यादा है, जिसका फायदा इस चुनाव में भी पार्टी को मिला.
चलिए कांग्रेस की हार के 5 बड़े कारण
कमजोर प्रदर्शन
2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन काफी खराब रहा. सत्ता में रहने के बावजूद कई मंत्री चुनाव हार गए थे. प्रदेश की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद कांग्रेस सत्ता में वापसी करने में कामयाब नहीं हो पाई. इसका असर उपचुनाव पर भी पड़ा.
बृजमोहन अग्रवाल का मैनेजमेंट
रायपुर दक्षिण विधानसभा सीट को बीजेपी का गढ़ माना जाता है. इस सीट पर बीजेपी के दिग्गज नेता और सांसद बृजमोहन अग्रवाल का दबदबा रहा है. वे इस सीट से हमेशा बड़ी मार्जिन से जीत हासिल करते आए हैं. बृजमोहन अग्रवाल की पॉपुलैरिटी के सामने कांग्रेस नहीं टिक पाई.
पार्टी में गुटबाजी
कांग्रेस की हार की एक बड़ी वजह पार्टी में गुटबाजी भी है. इस वजह से पार्टी एक दिशा में काम नहीं कर पाई, जिसका असर उपचुनाव में भी देखा गया.
दलदबल का असर
विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के कई बड़े नेता और कार्यकर्ता पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए थे. इसका फायदा उपचुनाव में बीजेपी को मिला.
बड़े चेहरे थे गायब
चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस के बड़े चेहरे नदारद थे. आकाश शर्मा को अकेले प्रचार करना पड़ा था. इतनी ही नहीं प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट की सभी में भी दिग्गज नेता नहीं थे. कांग्रेस बाहरी राज्यों के चुनाव पर ज्यादा फोकस कर रही थी.
किसने क्या कहा
रायपुर दक्षिण विधानसभा सीट जीतने के बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि ये डबल इंजन की जीत है. कांग्रेस को कुल उतने वोट भी नहीं मिले जितना हमारा जीत का आंकड़ा है. इस जीत के लिए मैं सभी को बधाई देता हूं. खास कर सांसद बृजमोहन अग्रवाल और मंत्री श्याम बिहारी और शिव रतन शर्मा को. तो वहीं सुनिल सोनी ने कहा कि यह जनता की जीत है, कार्यकर्ताओं की जीत है. विकास की दिशा में अब और तेजी से आगे बढ़ेंगे. बड़ी जीत के लिए जनता और कार्यकर्ताओं का आभारी हूं. तो वहीं कांग्रेस ने भी मान लिया कि इस चुनाव में पार्टी से कहीं न कहीं कोई चूक जरूर हुई है. कांग्रेस के उम्मीदावर आकाश शर्मा ने कहा कि जनता के मूड और पैटर्न को समझनें में चूक हुई है. 40 हजार लोंगो ने मुझे वोट दिया है. मैं जनता के बीच हमेशा रहूंगा.
Tags: Assembly by election, Chhattisgarh bjp, Chhattisgarh Congress, Chhattisgarh news, Raipur election
FIRST PUBLISHED :
November 23, 2024, 15:42 IST