जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने अपनी पार्टी की फंडिंग को लेकर लगाए गए आरोपों का जवाब दिया है। बिहार के पटना में बुधवार को आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि उनके पास पैसा उनकी बुद्धि और मां सरस्वती की कृपा से आता है। उन्होंने सत्तारूढ़ JDU यानी जनता दल (यूनाइटेड) के आरोपों पर कहा, मैं ठेकेदार, सांसद और विधायक तो कभी नहीं रहा।
बीजेपी पर भी किया कटाक्ष
पूर्व चुनावी रणनीतिकार ने बीजेपी पर भी कटाक्ष किया और आरोप लगाया कि सारा धन गुजरात जा रहा है। किशोर ने जद(यू) प्रवक्ता और विधान परिषद के सदस्य नीरज कुमार द्वारा उनकी पार्टी पर लगाए गए आरोपों की ओर इशारा करते हुए कहा, "लोग पूछ रहे हैं कि प्रशांत किशोर इतना पैसा कहां से ला रहे हैं।" नीरज कुमार ने हाल ही में आरोप लगाया था कि जन सुराज पार्टी को बेंगलुरु स्थित एक "धर्मार्थ" संगठन द्वारा वित्त पोषित किया गया है। जद(यू) नेता ने यह भी दावा किया है कि किशोर ने उक्त संगठन को 50 लाख रुपये का "दान" भी दिया था और साथ ही आरोप लगाया था कि यह "कर धोखाधड़ी" का मामला प्रतीत होता है।
"मैंने कभी ठेकेदारी नहीं की"
चुनावी रणनीतिकार के रूप में विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं के नेताओं के लिए काम कर चुके प्रशांत किशोर (PK) ने कहा, "मैंने कभी ठेकेदारी नहीं की, न कभी विधायक, सांसद बना। न ही मैं किसी सरकारी पद पर रहा और न ही मैं आईएएस या आईपीएस रहा। मेरे पास जो कुछ भी है वह मेरी बुद्धि और मां सरस्वती की कृपा से है और हम सब जानते हैं कि जिस पर सरस्वती जी की कृपा होती है उसके पास लक्ष्मी जी अवश्य आती हैं।"
"पैसा गुजरात के युवाओं के पास ही होगा?"
47 वर्षीय प्रशांत किशोर ने जनसुराज पार्टी के उन उम्मीदवारों का चुनावी खर्च वहन करने की कसम खाई है जिनके पास चुनाव लड़ने के लिए पर्याप्त धन नहीं है। किशोर ने तीखे लहजे में कहा, "क्या सारा पैसा गुजरात के युवाओं के पास ही होगा? भले ही सत्ता बिहार के युवाओं के वोट से हासिल हुई हो? अब यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बिहार के युवा हमेशा सस्ते श्रम का स्रोत नहीं रहेंगे।"
बिहार की राजनीति में सक्रिय हैं PK
बता दें कि एक चुनावी रणनीतिकार के रूप में प्रशांत किशोर का सफर 2012 में शुरू हुआ था, जब उन्होंने गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के विधानसभा चुनाव अभियान का प्रबंधन किया था। किशोर ने 2014 के लोकसभा चुनावों के लिए मोदी के प्रचार अभियान का भी प्रबंधन किया था, जो एक शानदार सफलता थी। अब वह अपनी जन सुराज पार्टी के माध्यम से बिहार की राजनीति में सक्रिय हैं। (इनपुट- भाषा)
ये भी पढ़ें-
मलंगगढ़ को लेकर क्या है विवाद? 1952 से कोर्ट में मामला लंबित; आज एकनाथ शिंदे करेंगे आरती
बेहद खौफनाक! नवजात की हुई मौत तो अस्पताल में फेंक दिया, कुत्ते खा गए पूरा सिर