अदाणी ग्रुप के फ़ंडामेंटल मज़बूत, शेयरों में उछाल, विरोध करने वालों को बाज़ार का करारा जवाब

21 hours ago 1

नई दिल्ली:

अदाणी समूह की कंपनियों के शेयरों में सोमवार को खासा उछाल दर्ज किया गया, जिससे स्पष्ट हो गया है कि हाल ही में अमेरिका में लगाए गए आरोपों से बाज़ार कतई विचलित नहीं है और समूह पर निवेशकों का भरोसा बरकरार है. शेयर बाज़ार में अदाणी समूह की लगभग सभी कंपनियां हरे निशान में दिख रही हैं, जिनमें अदाणी एनर्जी, अदाणी ग्रीन एनर्जी और अदाणी टोटल गैस प्रमुख हैं. इसके साथ ही ग्रुप ने पिछले 12 महीने में अपने कैश फ़्लो, कर्ज़ और कमाई का जो विवरण सार्वजनिक किया है, वह ग्रुप पर सवाल उठाने वाले देशी-विदेशी संगठनों को करारा जवाब है.

अदाणी समूह के फ़ंडामेंटल मज़बूत

समूह ने 12 महीने की जो रिपोर्ट पेश की है, उससे स्पष्ट हो गया कि समूह की आर्थिक हालत मज़बूत है. EBITDA में ठोस बढ़ोतरी और मज़़बूत कैश फ़्लो की बदौलत समूह की कर्ज़ पर निर्भरता भी तर्कसंगत है. गौरतलब है कि कर्ज़ की हालत बताने वाले फ़ाइनेंशियल इंडिकेटरों की तरफ़ देखें, तो अदाणी समूह का का नेट डेट-टू-EBITDA अनुपात 2.46x है, जबकि इसका गाइडेंस 3.5x-4.5x का था. इसके अलावा, कुल कर्ज़ के मुकाबले ग्रॉस एसेट 2.7x है, जो पिछले वित्तवर्ष के दौरान 2.6x था.

कैश फ़्लो में 5 साल से 30% से ज़्यादा बढ़ोतरी

समूह के EBITDA में 17 फ़ीसदी की बढ़ोतरी हुई है, और पिछले 12 माह के दौरान यह बढ़कर ₹83440 करोड़ हो गया है. इसके अलावा, समूह को ऑपरेशन से हासिल फ़ंड फ्लो (FFO) या नकद मुनाफा पिछले 12 महीनों में ₹58908 करोड़ रहा, और पिछले पांच साल से इसमें 30 फ़ीसदी से ज़्यादा की बढ़ोतरी हो रही है. इसका मतलब है कि समूह के पास अपने सभी कर्ज़ चुकाने के लिए पर्याप्त रकम मौजूद है, और समूह सिर्फ़ अपने मौजूदा वार्षिक नकदी प्रवाह के ज़रिये ही सिर्फ़ तीन साल में समूचा कर्ज़ चुका सकता है.

तरक्की न होने की स्थिति में भी 10 साल में चुका देंगे सारा कर्ज़

समूह की मज़़बूत वित्तीय स्थिति का अंदाज़ा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि अगर कोई तरक्की नहीं होने का अनुमान भी लगाया जाए, तब भी समूह सिर्फ़ अगले 10 साल में ही सिर्फ़ भीतरी तौर पर जुटाई जाने वाली नकदी से ₹5.9 लाख करोड़ का निवेश कर सकता है, और इससे बाहरी कर्ज़ पर निर्भरता बहुत कम हो जाएगी.

विदेश में बैठकर कुछ लोग और संगठन भारत की ग्रोथ स्टोरी के ख़िलाफ़ साज़िश रचते हैं. देश में मौजूद कुछ सियासी दल उनके हाथों को कठपुतली बनते हैं. महाराष्ट्र चुनाव नतीजों का मतलब यह समझा जा सकता है कि वोटरों ने ऐसे दलों को नकार दिया है. ओवरऑल बाज़ार और अदाणी ग्रुप की कंपनियों के शेयर में उछाल देखकर कहा जा सकता है कि निवेशकों ने भी ऐसे देश-विरोधी लोगों को करारा जवाब दे दिया है.

कर्ज़ के मुकाबले कहीं ज़्यादा बढ़ी अदाणी समूह की परिसंपत्तियां

वित्तवर्ष 2024-25 की पहली छमाही में समूह के कर्ज़ों से ज़्यादा बढ़ोतरी उसकी परिसंपत्तियों में हुई है. सकल संपत्ति में 51 अरब अमेरिकी डॉलर की बढ़ोतरी के मुकाबले समूह के कुल कर्ज़ सिर्फ़ 2 अरब अमेरिकी डॉलर बढ़े हैं. समूह की कुल परिसंपत्ति में इक्विटी का हिस्सा लगभग दो-तिहाई है, जो पांच साल पहले की तुलना में पूरी तरह पलट चुका है. वित्तवर्ष की पहली छमाही में समूह के कर्ज़ में सिर्फ़ ₹16882 करोड़ की बढ़ोतरी हुई है, जबकि निवेश लगभग ₹75227 करोड़ का रहा है. समूह का परिसंपत्ति आधार भी बढ़कर ₹5.5 लाख करोड़ हो चुका है, और समूह कंपनियों की 'रेटिंग' (साख) में सुधार से उधार लेने की औसत लागत 8.2 फ़ीसदी के साथ पिछले पांच साल में सबसे कम है. समूह ने जो कुल कर्ज़ ले रखा है, उसमें भारतीय बैंकों से लिया गया कर्ज़ 42 फ़ीसदी है, और वह रकम सिर्फ़ 11 अरब अमेरिकी डॉलर है, जबकि भारतीय बैंकों में समूह का छह अरब डॉलर नकदी जमा भी है. वैश्विक बैंकों से उधारी कुल कर्ज़ का 27 फ़ीसदी है.

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