सहीजन के पौधे
आजमगढ़: देश भर में कई ऐसे किसान हैं, जो पारंपरिक खेती से हटकर कुछ नए तरीके एवं नई तकनीक का इस्तेमाल करते हुए विभिन्न प्रकार की फसलों की उपज कर रहे हैं, जिससे वह न केवल भारत के कृषि जगत में तकनीक और जुगाड़ का इस्तेमाल करते हुए तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, बल्कि वह अपने आत्मनिर्भरता की भी नई इबादत भी लिख रहे हैं. इसी तरह यूपी के आजमगढ़ जनपद में एक किसान ने सहजन की खेती करते हुए अपने आपको कृषि के क्षेत्र में सशक्त करते हुए अपने साथ-साथ गांव की लगभग 200 महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनाने का काम किया है.
महिलाएं हो रही आर्थिक रूप से मजबूत
आजमगढ़ जिले के साथियों ब्लॉक के संग्रामपुर गांव के निवासी राजेश यादव सहजन की खेती के साथ-साथ उसके विभिन्न उत्पाद भी बेच रहे हैं. राजेश पारंपरिक खेती से हटकर अलग तरह की खेती करने की सोच ने उन्हें युवाओं के लिए भी प्रेरणा स्रोत बना दिया है. वह अपने खेत में विभिन्न प्रकार के फसलों की बुवाई करते हुए काफी शोध करने के बाद सहजन की खेती करने का निर्णय लिया.
किसान राजेश यादव के इस निर्णय से आज उनके साथ-साथ गांव की कई महिलाओं के लिए भी रोजगार का मौका खोल दिया है. सहजन में काफी औषधि या गुण होता है. यही कारण है कि इसकी मार्केट में काफी अधिक डिमांड है. वहीं, महिलाएं सहजन से विभिन्न उत्पाद जैसे साहजन के पत्तों के पाउडर, अचार व लड्डू आदि बना रही हैं, जो मार्केट में बिक रहा है, जिससे उनकी अच्छी आमदनी हो रही है. ऐसे में गांव की महिलाओं को रोजगार मिलने से वह भी आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं.
सरकारी भूमी पर उगाई ये फसल
किसान ने बताया कि वह सहजन की खेती की शुरुआत अपनी जमीन से की थी. इसके बाद जैसे-जैसे सहजन की मांग बढ़ने लगी वैसे-वैसे उनकी खेती का दायरा भी बढ़ने लगा. अब वह बड़े स्तर पर उत्पादन के करने लगे हैं. इसके लिए उन्होंने अपने गांव सहित अन्य जगहों पर बंजारा और बेकार पड़ी जमीनों पर सहजन की खेती की शुरुआत की.
इसके लिए उन्होंने गांव से सटे एवं सड़क के किनारे खाली पड़ी जमीनों का भी इस्तेमाल किया. सहजन के बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए उन्होंने सरकारी भूमि का इस्तेमाल करने के लिए गांव के प्रधान एवं क्षेत्र के वीडियो आदि संबंधित अधिकारियों से भी संपर्क किया, जिसके बाद उन्हें अधिकारियों का पूरा सहयोग मिला.
किसान ने तैयार किया 10 हजार सहजन के पेड़
किसान राजेश यादव ने लोकल 18 से बताया कि उन्होंने वन विभाग एवं अन्य अधिकारियों की मदद से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के किनारे एवं कई अन्य जगहों को मिलाकर लगभग 5 किलोमीटर के दायरे में 10 हजार सहजन के पौधों की रोपाई की है. इन जगहों पर उन्होंने सहजन की विकसित किस्म ओडीसी मोरिंगा नामक प्रजाति के पौधों की रोपाई की है. सहजन की यह प्रजाति साल में 3 बार फल देती है. जिसे मार्केट में बेचकर वह अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं.
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FIRST PUBLISHED :
November 21, 2024, 13:08 IST