63 साल बाद आएगा नया इनकम टैक्‍स बिल, कैसे होगा पुराने से अलग, जानिए

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Last Updated:February 03, 2025, 18:29 IST

New Income Tax Bill- नया आयकर कानून 6 फरवरी को सदन के पटल पर रखा जा सकता है. पुराने आयकर कानून में लगभग 6 लाख के करीब शब्द हैं जो इस नए बिल में घटकर 3 लाख के करीब रह जाएंगे. नए इनकम टैक्‍स बिल की भाषा भी सरल हो...और पढ़ें

63 साल बाद आएगा नया इनकम टैक्‍स बिल, कैसे होगा पुराने से अलग, जानिए

सरकार ने संकेत दिए हैं कि इस नए इनकम टैक्स बिल में कई बड़े और व्यापक बदलाव किए जाएंगे.

हाइलाइट्स

  • बजट में नया आयकर अधिनियम लाने की हुई थी घोषणा.
  • मौजूदा आयकर अधिनियम 1962 में हुआ था प्रभावी.
  • नया अधिनियम समझने में होगा आसान.

नई दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2025 को बजट पेश करते हुए कहा था कि सरकार चालू संसद सत्र में नया इनकम टैक्स बिल पेश करेगी. वर्तमान में भारत में इनकम टैक्स अधिनियम, 1961 लागू है, जिसे 1 अप्रैल 1962 से प्रभाव में लाया गया था. इस कानून के तहत समय-समय पर कई संशोधन किए गए, लेकिन मूल ढांचे में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ. आईएएनएस ने सूत्रों के हवाल से जानकारी दी है कि 6 फरवरी को यह बिल संसद के पटल पर रखा जा सकता है. वित्त मंत्रालय के अनुसार, मौजूदा इनकम टैक्स कानून जटिल और पुराने ढांचे पर आधारित है, जो बदलती आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप नहीं है. डिजिटल युग में टैक्स फाइलिंग और प्रोसेसिंग के नए तरीकों की जरूरत है. नया बिल टेक्नोलॉजी फ्रेंडली होगा और इससे टैक्सपेयर के अनुभव को बेहतर बनाया जाएगा. विधेयक को पहले संसद में पेश किया जाएगा. इसके बाद करदाताओं और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया के आधार पर इसमें संशोधन किया जा सकता है.

नया इनकम टैक्‍स अधिनियम लागू होने से 63 साल बाद देश का टैक्स ढांचा पूरी तरह बदल जाएगा, जिससे न केवल टैक्सपेयर्स को सुविधा होगी बल्कि सरकार के लिए टैक्स प्रशासन भी अधिक प्रभावी और प्रभावशाली होगा. सरकार के सूत्रों की मानें तो यह नया इनकम टैक्स एक्ट 21वीं सदी की जरूरतों के हिसाब से बनाया जा रहा है. इस तकनीक के दौर में टैक्सपेयर को काफी चीजें खुद करना होता है. ऐसे में लोगों के लिए इस इनकम टैक्स में ऐसा बदलाव होगा जो सामान्य मानवीय को अच्छी तरह से समझ में आ सके. यह सिस्टम इतना सरल बनाने की कोशिश है कि लोगों को इसमें कोई परेशानी न हो. टैक्स एक्सपर्ट का मानना है कि इससे टैक्स कानून आसान बनेंगे, कानूनी विवाद कम होंगे और टैक्सपेयर्स लिए पूरा प्रोसेस पहले से आसान हो जाएगा.

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आयकर कानून में बदलाव का तीसरा प्रयास
यह तीसरा प्रयास है जब आयकर अधिनियम को फिर से लिखने की कोशिश की जा रही है। इससे पहले 2010 में प्रत्यक्ष कर संहिता (Direct Tax Code) विधेयक पेश किया गया था. इसके बाद साल 2014 में नरेंद्र मोदी सरकार ने विशेषज्ञों का एक पैनल गठित किया, लेकिन उनकी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई और सिफारिशों को लागू नहीं किया गया.

फिर सरकार ने आयकर अधिनियम की समीक्षा के लिए एक समिति का गठन किया गया था. पिछले कुछ दिनों से वित्त मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के अधिकारी भी इस विधेयक को अंतिम रूप देने के लिए समिति के साथ मिलकर काम कर रहे हैं. अब तीसरे प्रयास में पुराने आयकर अधिनियम की जगह सरकार नया आयकर अधिनियम संसद में पेश करेगी.

ये हो सकते हैं बदलाव
सरकार ने संकेत दिए हैं कि इस नए इनकम टैक्स बिल में कई बड़े और व्यापक बदलाव किए जाएंगे, जो करदाताओं के लिए प्रक्रिया को आसान बनाएंगे. आइए जानते हैं, इस बिल में क्या-क्या संभावित सुधार हो सकते हैं:

  • सरल भाषा और कम प्रावधान: नए बिल को आसान भाषा में लिखा जाएगा, जिससे आम करदाता को इसे समझने में किसी तरह की परेशानी न हो. साथ ही, अनावश्यक और जटिल प्रावधानों को हटाकर कानून को सरल बनाया जाएगा. पुराने आयकर कानून में लगभग 6 लाख के करीब शब्द हैं जो इस नए बिल में 3 लाख के करीब रह जाएंगे और यह करदाताओं को समझने के लिए भी आसान होगा.
  • डिजिटल प्रोसेस को बढ़ावा: टैक्स फाइलिंग प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल किया जा सकता है. इससे दस्तावेज़ी प्रक्रियाओं में लगने वाले समय और संसाधनों की बचत होगी, और करदाता ऑनलाइन माध्यम से आसानी से रिटर्न दाखिल कर सकेंगे.
  • पारदर्शिता : सरकार का उद्देश्य टैक्स से जुड़े लिटिगेशन को कम करना है. अभी जो इनकम टैक्स रूल है उसमें एक कोट में किसी चीज की व्याख्या अलग होती है, दूसरे में अलग. यानी यह कानून पूरी तरह से खिचड़ी की तरह बन गया है. नए अधिनियम में नियमों को पारदर्शी बनाया जाएगा. व्‍याख्‍याओं में समानता लाई जाएगी ताकि करदाताओं और सरकार के बीच विवाद की स्थिति कम उत्पन्न हो.
  • सिंगल ‘टैक्स ईयर’: मौजूदा समय में असेसमेंट ईयर और फाइनेंशियल ईयर अलग-अलग होते हैं. नए बिल में इन दोनों को मिलाकर एक ही ‘टैक्स ईयर’ बनाने का प्रस्ताव हो सकता है, जिससे टैक्स प्रक्रिया और आसान होगी.
  • डिडक्शन और छूट में बदलाव: टैक्स स्ट्रक्चर को सरल बनाने के लिए डिडक्शन और छूट की संख्या कम की जा सकती है. इससे टैक्स कैलकुलेशन आसान होगा और टैक्सपेयर्स के लिए पारदर्शिता बढ़ेगी.

Location :

New Delhi,New Delhi,Delhi

First Published :

February 03, 2025, 18:29 IST

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