Agency:Local18
Last Updated:January 22, 2025, 18:29 IST
Jeera ki kheti: बनासकांठा जिले में जीरे की खेती में किसानों को कीटों और रोगों से बचने के लिए वैज्ञानिक तरीकों को अपनाने की सलाह दी गई है. फफूंदनाशक, खाद प्रबंधन, सही जात चयन और सिंचाई से अच्छा उत्पादन संभव है.
बनासकांठा जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों जैसे वाव, थराद और सुईगाम में जीरे की खेती काफी महत्वपूर्ण हो रही है. पिछले कुछ समय से जीरे के किसानों को कई प्रकार के रोगों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन यदि वे वैज्ञानिक तरीके अपनाएं तो अच्छा उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं.
बीज की गुणवत्ता जरूरी
डीसा के कृषि वैज्ञानिक डॉ. योगेश पवार के अनुसार, किसानों को जीरे की खेती शुरू करने से पहले बीज की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना चाहिए. बीज की बुवाई के समय फफूंदजन्य रोगों से बचने के लिए बीज में तीन ग्राम फफूंदनाशक दवा का उपयोग करना चाहिए. इससे बीज को रोगों से बचाया जा सकता है, जिससे फसल की अच्छी वृद्धि हो सकती है.
सिंचाई पर विशेष ध्यान
खाद प्रबंधन के बारे में डॉ. योगेश पवार ने बताया कि प्रत्येक एकड़ में 40 किलो नाइट्रोजन और 15 किलो फॉस्फोरस का उपयोग करना चाहिए. नाइट्रोजन की आधी मात्रा बुवाई के समय और बाकी की मात्रा आठवें और तीसवें दिन देना आवश्यक है. सिंचाई का भी महत्वपूर्ण स्थान है. पहली सिंचाई बुवाई के समय, दूसरी आठ से दस दिन बाद, और फिर तीसरी और चौथी सिंचाई 30 और 45 दिन बाद करनी चाहिए. इस प्रकार कुल चार सिंचाई पर्याप्त होती है.
सूकड़ा रोग और कीटों का नियंत्रण
जीरे की खेती में सूकड़ा रोग और कीटों के आक्रमण से बचने के लिए वैज्ञानिक उपाय अपनाने चाहिए. सूकड़ा रोग के नियंत्रण के लिए बुवाई के समय प्रति एकड़ एक किलो ट्राइकोडर्मा मिलाना चाहिए. अगर मिट्टी में सूक्ष्म तत्वों की कमी हो तो मल्टी-माइक्रोन्यूट्रिएंट्स का इस्तेमाल करना चाहिए. इसके अलावा, कीटों और मोलों के नियंत्रण के लिए 35 दिन बाद मैन्कोजेब का छिड़काव करना चाहिए. इसे हर 10 दिन में करना चाहिए. मोलों के लिए नीम का तेल या कार्बोसल्फान का उपयोग किया जा सकता है.
सही जात चयन और बुवाई की दिशा
सही जात का चयन भी फसल के अच्छे उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण है. गुजरात जीरा-4 (GC-4) जीरे की सबसे अच्छी किस्म मानी जाती है, क्योंकि यह सूकड़ा रोग के खिलाफ प्रतिरोधी है. इसके अलावा, बुवाई पूर्व-पश्चिम दिशा में और 30 सेंटीमीटर की दूरी पर करनी चाहिए ताकि फसल को पर्याप्त धूप और हवा मिल सके.
First Published :
January 22, 2025, 18:29 IST
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